दोस्तों, जिम कॉर्बेट, नेशनल पार्क का नाम मिस्टर जिम कॉर्बेट जी के नाम पर रखा गया है क्योंकि उन्होंने तैंतीस आदमखोर को मार डाला था, जिसमें से 19 बाघ थे। लेकिन उन 19 बाघों में से एक जो आदमखोर नहीं था, निर्दोष था।
उसका केवल एक कसूर था कि वो बहुत विशालकाय और असामान्य रूप से बड़ा टाइगर था। बस इसी गलती ने उसकी जान ले ली। और जिम कॉर्बेट जी जिन्होंने 1920 के दशक के अंत में उन्हें शपथ दिलाई थी कि वह बाघों का शिकार नहीं करेंगे। सिर्फ आदमखोर ही मारे गए।
कसम खाने के 10 साल बाद यानी 1930 में कॉर्बेट ने अपनी कसम तोड़ दी क्योंकि उस समय ट्रॉफी हंटिंग की जाती थी। यानी शिकार किया हुआ जानवर ड्राइंग रूम की ट्रॉफी की तरह होता है। सारे रसूख वाले ट्रॉफी हंटर ग्रैजुएट ऑफ पवलगढ़ को हासिल करना चाहते थे। जिंदा नहीं सिर्फ और सिर्फ मुर्दा।
उसके विशाल आकार के बारे में सुन के कॉर्बेट ने भी अपनी कसम तोड़ दी और वो निर्दोष कुंवारा ही मारा गया। अगर उसे अपना घर बसाने का मौका मिलता तो शायद आज हम कह सकते थे कि सबसे बड़ा टाइगर साइबेरियन टाइगर नहीं। रॉयल बंगाल टाइगर उतर आया। आपको बताता हूं कैसे वो विशाल गैर निर्दोष टाइगर मारा गया। बैचलर ऑफ पवलगढ़ एक असामान्य रूप से बड़ा करियर था, जिसमें साइज था 10 फीट सात इंच। सन 1920 से 1930 के बीच में जिस समय रसूख वाले लोग ट्रॉफी हंटिंग करते थे, यानी शेर को मारकर उसके शरीर या सिर को अपने ड्राइंगरूम में ट्रॉफी की तरह सजाते थे। उस समय इस टाइगर को मारना हर ट्रॉफी हंटर का सपना था।
जिसको मारने के लिए फौलाद की औलाद होना जरूरी था। इसलिए वो पवलगढ़ के जंगल में राज करता रहा कॉर्बेट ने बैचलर ऑफ पवलगढ़ को पहली बार 1923 में देखा था। वो तीन साल पहले निर्दोष टाइगर को न मारने की कैसे भूल गया। उस समय ब्रिटिश सरकार का नियम था दिन में शिकार करो, लेकिन रात में न करो तो दिन में बैचलर आराम करता था और रात में शिकार। इसलिए वो शिकारियों से बचा हुआ था। कॉर्बेट जो ब्रिटिश आर्मी के कर्नल थे। उन्होंने कमिश्नर वार्डन को साथ लिया क्योंकि ये माना जाता था कि जितना कमिश्नर वन्य प्राणियों के बारे में जानते हैं उतना तो टाइगर खुद भी नहीं जानता। अपने बारे में टाइगर को एक पगमार्क मिला। नापा गया और कमिश्नर ने बताया कि ये टाइगर करीब 10 फीट पाँच इंच का हो। बैचलर ऑफ पवलगढ़ न सिर्फ विशालकाय था बल्कि चतुर भी था और किस्मत का भी धनी था। दो बार उसका शिकारियों से नजदीकी से सामना हो चुका था,
लेकिन दोनों बार उसकी किस्मत ने साथ दिया। शिकारी अंडरसन से सामना हुआ तो अंडर सन् की बंदूक कही। उलझ गई और जब तक बंदूक निकली चतुर बैचलर गायब हो चुका था। अंडरसन ने उसको नजदीक से देखा और उसको घोड़े के आकार का बताया। दूसरे शिकारी एडी से उनका भी सामना हुआ नजदीक से। लेकिन जब बैचलर सामने आया तो एडी को उम्मीद नहीं थी पर वो अपना पाइप भर रहा था। चतुर बैचलर शेर गायब हो गया। कैडी ने बताया कि बैचलर गधे के आकार का टाइगर है एक चरवाहा जो पहले शिकारी था, जिसे बैचलर ने धमकाया था उसके जानवरों के शिकार के लिए उसने बैचलर को ऊंट के आकार का बताया।
जब सात साल बाद कॉर्बेट ने बैचलर को मारा और उसका साइज नापा तो करीब वही सही साइज था, जो कमिश्नर ने बताया था। कमिश्नर ने 10 फीट पाँच इंच बताया था और बैचलर था। 10 फीट सात इंच का। सन् 1930 में एक डाक रनर जो कि पैदल डाक लेकर जाता था, उसने बताया कि उसने बहुत बड़ा टाइगर का पगमार्क देखा। इतना बड़ा पग उसने पहले कभी नहीं देखा था। अगली सुबह कॉर्बेट अपने कुत्ते रॉबिन के साथ जंगल में निकल गया। रॉबिन ने टाइगर की स्माइल सुन ली और कॉर्बेट को बैचलर के काफी करीब पहुंचा दिया। लेकिन कॉर्बेट के पास प्रॉपर गन नहीं थी। इतने बड़े टाइगर को मारने के लिए और नाश्ते का टाइम भी हो गया। कॉर्बेट घर आए और नाश्ता किया और रॉबिन को घर पर छोड़कर वापस जंगल चले गए। इस बार उनके हाथ में थी प्वाइंट फोर जीरो राइफल। जब वो जंगल पहुंचे तो जंगल में उन्हें एक आदमी के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। पास जाकर उन्होंने देखा कि एक आदमी पेड़ पर चढ़ा हुआ है और अपनी कुल्हाड़ी पेड़ पर मारा। वो टाइगर को डराने जाकर टाइगर उसकी भैसों को मारने आया था, लेकिन साथी को देखकर साइड में चला गया।
ये आदमी वही आदमी था, जो पहले शिकारी था और जिसने टाइगर को ऊंट के आकार का बताया था। कॉर्बेट से उसने कहा कि आप आगे। इसलिए मेरी जान बच गई, लेकिन अब उस टाइगर की जान न बचने पाए क्योंकि वो इतना बड़ा है कि मेरी एक भैस को एक दिन में खा सकता है पर वो मेरी 25 भैसों को 25 दिन में साफ कर देगा। कॉर्बेट तो पहले से ही बैचलर को ढूंढ रहे थे। प्वाइंट फोर फाइव जीरो की रायफल को लेकर अब कॉर्बेट प्लेन ग्रासलैंड में आगे और वे बैचलर की आवाज सुनाई दी। बैचलर अपनी मेहबूबा की तलाश में था और कॉर्बेट जानवरों की आवाज पहचानते थे और खुद भी जानवरों के आवाज निकाल लेते थे। उन्होंने भी वैसी ही आवाज निकाली। उधर से बैचलर ने जवाब दिया कि उसे लगा कि अब इंतजार की घड़ी खतम उसे इंतजार था। अपनी महबूबा से मिल लेगा, लेकिन उसे नहीं पता था कि ये मौत की आवाज लेकिन चतुर बैचलर दिल से मजबूर सा है और गलती कर बैठा।
कॉर्बेट जमीन पर झाड़ियों के पास लेटकर अपनी पोजीशन ले चुके थे और उन्होंने फिर टाइग्रेस की आवाज निकाली। करीब 100 मीटर दूर से बैचलर ने फिर जवाब दिया कॉर्बेट रेडी थे और करीब 80 सेकंड बाद बैचलर का सर झाड़ियों से निकला। कॉर्बेट ने उसकी आंख के एक इंच नीचे निशाना लगाकर गोली मार दी। कॉर्बेट को लगा था कि जब नीचे गिर जाए लेकिन वह बाहुबली बैचलर ऑफ पवलगढ़ था। उसने हवा में जंप लगाई और अपने पीछे के पेड़ को तहस नहस कर दिया।
अगर आप कहानी आगे पढ़ ना चाहते हैं तो कमेंट करें...











